अजय चहल 'मुसाफ़िर'

सोमवार, 8 अगस्त 2016

अक्सर

कई बार, सच ना बोलने वाले ही, झूठे नहीं होते,
अक्सर, कुछ ना बोलने वाले भी, सच्चे नहीं होते।

मौन भी मुखर होता है, पर नीयत के हिसाब से,
अक्लमंद देखा है मैंने, जाने कितने अनपढ़ों को,
अक्सर, मूर्खों की फेहरिस्त में मिले, कुछ पढ़े हुए किताब से ।।

----
लेखनी: अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for taking time to write here.