कई बार, सच ना बोलने वाले ही, झूठे नहीं होते,
अक्सर, कुछ ना बोलने वाले भी, सच्चे नहीं होते।
मौन भी मुखर होता है, पर नीयत के हिसाब से,
अक्लमंद देखा है मैंने, जाने कितने अनपढ़ों को,
अक्सर, मूर्खों की फेहरिस्त में मिले, कुछ पढ़े हुए किताब से ।।
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लेखनी: अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत
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