गर कोई उसका गुनाह बता दे।
सजदा तो फिर लाजिमी है,
गर कोई खुद को खुदा बता दे।।
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अजय चहल 'मुसाफ़िर'
पंचकूला, हरियाणा।
आंख का देखा और कान का सुना; अनबोले वो शब्द, जिन्हें मन ही मन गुना; धीमे-धीमे दिल पर जो असर करते गए, उन्हें कलम के सहारे, 'लेखनी' में बुना ||
दर्द को बस, वही कहे,
जिसने हैं, वो दर्द सहे।
जिसने जिया, वही जाने,
आँसू कैसे, स्याही बन बहे।
{सिर्फ सहने वाला ही जानता है, उस पे क्या गुजरी है। और सिर्फ कहने वाले, अक्सर हमदर्द नहीं, बेदर्द हैं।}
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लेखनी: अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत
अपनी ही जिंदगी कुछ ऐसे जी जाए,
कि औलाद को जब समझ दी जाए,
नाम किसी और का तब लेना ना पड़े,
उदाहरण किसी और का देना ना पड़े।
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आभार: Dr. S. S. Mor
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लेखनी: अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत
दर्द एक से हैं सारे,
बस होंसले हैं न्यारे-न्यारे;
कोई हताश हो बिखर गया,
कोई संघर्ष कर निखर गया।
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अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत
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| Pic credits: Flickr |
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| There are so many victims like Sonali |
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| Picture Credits: Anil K Mathew |