अजय चहल 'मुसाफ़िर'

मंगलवार, 31 जनवरी 2017

बलिदान

'बलिदान' - 'बलि' और 'दान' का मेल है।
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'बलिदान' शब्द का रहा हमेशा स्वर्णिम इतिहास है,
ये है, हर उस पल का हिस्सा, जो ख़ास है,
शूरवीरों का है गहना और आम-जन की आस है।।

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लेखनी:
अजय चहल 'मुसाफिर'
चेन्नई, भारत
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 (शहीदी दिवस - 2017)



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