अजय चहल 'मुसाफ़िर'

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

ख़ूबी

ख़ूबी तो उस नज़र में थी,
जिसने हमें देख लिया, हमसे भी बेहतर।
वर्ना हम तो ख़ाकसार हैं, पहले रोज़ से।


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लेखनी: 
'मुसाफ़िर'
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शायद, इस बार वो नज़र कैमरे की थी ....
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Beauty lies..
in beholder's eyes..

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Picture Credits: Anil K Mathew

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