अजय चहल 'मुसाफ़िर'

मंगलवार, 31 मार्च 2026

शख्स

आज फिर शीशे के सामने एक अजीब शख्स था, 
जिस्म था मेरा, पर उसके चेहरे पे तेरा अक्श था।
~
मुसाफ़िर
*अक्श: हूबहू तस्वीर/Reflection

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