अजय चहल 'मुसाफ़िर'

बुधवार, 15 अप्रैल 2026

गुनाह

बन्दे को है, हर सजा कबूल,
गर कोई उसका गुनाह बता दे।
सजदा तो फिर लाजिमी है,
गर कोई खुद को खुदा बता दे।।
~
अजय चहल 'मुसाफ़िर'
पंचकूला, हरियाणा।

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