अजय चहल 'मुसाफ़िर'

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

चाहत

गर चाहत कहे, 
चाहत को, 
चाहत से,
"फासला रखो",
और 
चाहत मान ले, 
चाहत से,
तो मानो, 
कि चाहत है।
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लेखनी:
अजय चहल मुसाफ़िर
जींद, हरियाणा

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