अजय चहल 'मुसाफ़िर'

शनिवार, 2 मार्च 2019

होंसले

दर्द एक से हैं सारे,
बस होंसले हैं न्यारे-न्यारे;

कोई हताश हो बिखर गया,
कोई संघर्ष कर निखर गया।
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अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत

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