अजय चहल 'मुसाफ़िर'

सोमवार, 6 अगस्त 2018

यार

घर जैसे बना होता है दीवारों से,
यूँ ही कतरा कतरा,
हम भी बने हैं, हमारे यारों से।

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लेखनी:
अजय चहल 'मुसाफिर'
भारत


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