अजय चहल 'मुसाफ़िर'

सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

मलाल

खुद ही से सवाल वो करता रहा,
खुद ही के जवाब से डरता रहा।

जो बात थी ही नहीं, मेरे जहन में,
कमबख्त उसी का मलाल करता रहा।

बस वक़्त के ही फासले थे, दिलों के दरमियान,
पल भर की खुशी खातिर, वो बरसों मरता रहा।
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लेखनी: अजय चहल 'मुसाफ़िर'
चेन्नई, भारत



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