अजय चहल 'मुसाफ़िर'

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

गुज़ारिश


जितने भी अरमान, आपके दिल में पल रहे होंगे ;
वो रोशनी और तपिश ले , पहुंचे हर जहन में,
गुज़ारिश मेरी उन दीयों से, जो आज कि रात जल रहे होंगे।।

"दीवाली मुबारक़ "

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लेखनी : अजय चहल 'मुसाफ़िर'

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